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यूपी एटीएस का दावा : अल क़ायदा टेरर मोड्यूल का भंडाफोड़, दो गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश आतंकनिरोधी स्क्वैड यानी यूपी एटीएस ने अल क़ायदा के एक आत्मघाती टेरर मोड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है।

इस सिलसिले में लखनऊ ज़िले से दो संदिग्ध आतंकवादियों मिन्हाज अहमद और मसीरुद्दीन को गिरफ़्तार किया गया है। 

यूपी एटीएस का कहना है कि इस अल क़ायदा टेरर मोड्यूल की योजना लखनऊ और दूसरे शहरों में भीड़ भरी जगहों पर आत्मघाती हमले की थी जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मौत हो सकती थी। 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 

यूपी एटीएस ने एक बड़े आंतकवादी मोड्यूल का पता लगाया है। अल क़ायदा के अन्सार ग़ज़ावत-उल-हिंद के दो आतंकवादियों को गिरफ़्तार किया गया है। उनके पास से हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं।

प्रशांत कुमार, वरिष्ठ अधिकारी, यूपी एटीएस
पाकिस्तान का हाथ?
उन्होंने कहा कि इस मोड्यूल के लोगों को पाकिस्तान के पेशावर व क्वेटा से संचालित किया जा रहा था। 

पुलिस ने कहा है कि मिन्हाज लखनऊ ज़िले के काकोरी का रहने वाला है, उसकी उम्र 30 के क़रीब है और उसके पास से एक पिस्टल व विस्फोटक मिले हैं। 

यूपी एटीएस की एक दूसरी टीम ने जौनपुर ज़िले के मरियाहू से 50 वर्षीय मसीरुद्दीन को पकड़ा है। उसके पास से विस्फोटक सामग्री के अलावा एक कुकर भी बरामद किया गया है। इस कुकर का इस्तेमाल बम के रूप में किया जा सकता था। 

यूपी एटीएस ने दावा किया है कि यह टेरर मोड्यूल इमारतों और अन्य सार्वजनिक इलाक़ों में हमले की योजना बना रहा था। इस ग्रुप में लखनऊ और कानपुर के लोग भी शामिल थे। उनकी तलाश जारी है। 

UP ATS unearths Al qaeda terror module - Satya Hindi
पाकिस्तान की भूमिका?
भारत में अल क़ायदा टेरर मोड्यूल और उसकी योजनाओं का पता ऐसे समय चला है जब कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने पहली बार यह औपचारिक तौर पर माना कि उसने अल क़ायदा आतंकवादियों को समर्थन और प्रशिक्षण दिया था। 

अल क़ायदा ने ही अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर  9/11 का आतंकवादी हमला किया था, जिसमें तक़रीबन 3 हज़ार लोग मारे गए थे। 

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी थिंकटैंक 'कौंसिल ऑन फॉरन रिलेशन्स' की बैठक में यह माना कि पाकिस्तानी सेना ने अल क़ायदा आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया था।
क्या है अल क़ायदा?
सुन्नी इसलाम के कट्टरपंथी सोच बहावी या सलाफ़ी दर्शन से प्रभावित इस संगठन की स्थापना 1988 में की गई थी। इसका मक़सद निज़ाम-ए-मुस्तफ़ा यानी पैगंबर मुहम्मद के बताए नियमों के आधार पर पूरी दुनिया में इसलामी राज स्थापित करना है।

यह यहूदियों, ईसाइयों और कम्युनिस्टों के ख़िलाफ़ है।

अफ़ग़ानिस्तान से लेकर मध्य-पूर्व होते हुए दुनिया के अलग-अलग इलाक़ों में इसकी शाखाएँ फैल गईं, यह अफ़्रीका और रूस तक फैल गया और हज़ारों लोग इससे जुड़ गए।

इसका पहला और अब तक का सबसे बड़ा नेता ओसामा बिन लादेन था, जो 1988 से लकर 2011 तक रहा। उसके बाद लादेन के दोस्त और रिश्तेदार अयमान अल-जवाहिरी ने कमान संभाली और वह अब तक इसका सरगना है। 

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