Madhusudan Dwadashi के दिन करें ये काम, पुरे कुल का होगा उद्धार

नई दिल्ली (लोकसत्य)। ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष एकादशी को अपरा एकादशी, अचला एकादशी एवं भद्रकाली एकादशी नाम से जाना जाता है। समस्त पापों से मुक्ति दिलाने वाले और मोक्ष की प्राप्ति कराने वाले इस व्रत को द्वादशी को सूर्योदय होने तक रखा जाता है। ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष द्वादशी को मधुसूदन द्वादशी नाम से जाना जाता है। सर्व मंगलकारी यह दिन रुक्मिणी द्वादशी नाम से भी जाना जाता है। जो की इस बार 7 जून को है यह व्रत भगवान गोविन्द को समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु इसे किया जाता है। जो सब प्रकार का सुख-वैभव देने वाला और कलियुग के समस्त पापों का शमन करने वाला है। इसमें ब्राह्मण को दान, पितृ तर्पण, हवन, यज्ञ आदि का बहुत ही महत्व है।

शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का व्रत संपूर्ण होने के बाद द्वादशी के दिन श्री हरि विष्णु भगवान को तुलसी दल अर्पण करना चाहिए। ऐसे करने वाला मनुष्य अपने समूचे कुल का उद्धार करने के साथ स्वयं वैकुंठ की प्राप्ति करता है। मधुसूदन द्वादशी के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र का दान अवश्य करना चाहिए। कहा जाता है कि ज्‍येष्‍ठ मास में इस विशेष दिन उपवास रखने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। द्वादशी तिथि पर श्री हरि भगवान विष्णु को चंदन, पुष्‍प, फल, जल अर्पित करें।

जुडी मान्यताएं
इस व्रत को भगवान ने भीष्म को बताया था और उन्होंने इस व्रत का प्रथम पालन किया जिससे इसका नाम भीष्म द्वादशी व्रत हुआ। इसकी विधि एकादशी के समान ही है। इसे करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

जन्म-जन्मांतरों के एक अहीर अर्थात यादव कन्या ने इस व्रत का पालन किया था जिससे वह अप्सराओं की अधीश्वरी हुई और वही उर्वशी नाम से विख्यात है। यह व्रत कलियुग के पापों को नष्ट करने वाला है। माघ मास की द्वादशी परम पूजनीय कल्याणिनी है। इस तिथि पर पितृ तर्पण आदि क्रियाएं की जाती हैं तथा श्रद्धा व भक्तिपूर्ण ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है तथा विभिन्न प्रकार के दान, हवन यज्ञादि क्रियाएं भी की जाती हैं।

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