महिलाओं को मासिक धर्म के समय क्यों नहीं करनी चाहिए पूजा

नई दिल्ली (लोकसत्य)। मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं के लिए सभी धार्मिक कार्य वर्जित हैं। सिर्फ हिन्दू धर्म में ही नहीं, लगभग सभी धर्मों में ऐसे कई दकियानुसी नियम हैं जिनके पीछे छुपे तथ्य को समझना थोडा मुश्किल लगता है। प्रकृति ने स्त्री को ऐसा बनाया है कि उसे हर महीने मासिक धर्म के चक्र से गुजरना होता है। इसको लेकर धार्मिक और सामाजिक जीवन में कई तरह की भ्रांतियां हैं। जबकि इसी चक्र के कारण स्त्री पुरुषों से अधिक शुद्ध, शक्तिशाली और प्रभावशाली बनती हैं। इसके बारे में देवी पार्वती ने शिव पुराण में कहा है कि अगर मासिक धर्म के कुछ नियमों का पालन किया जाए तो स्त्री अपने सुहाग की आयु बढ़ा सकती है साथ ही अपने वैवाहिक जीवन को अधिक आनंदित, सुखी और संपन्न बना सकती हैं।

मासिक धर्म के समय स्त्री को भगवान की मूर्ति का स्पर्श नहीं नहीं करना चाहिए। इस समय किसी को दान दक्षिणा भी नहीं देना चाहिए ऐसा शिव पुराण में बताया गया है। दरअसल इस समय शरीर की शुद्धि की प्रकिया चल रही होती है। जिससे शास्त्रो में स्त्री को इस समय सभी सांसारिक कार्यों और देव-पितृ कार्यों से मुक्त किया गया है। इस समय मानसिक जप करना मन और शरीर दोनों के लिए लाभप्रद माना गया है।
कुछ तर्क जो वितर्क से लगते हैं।

महिलाओं में इस समय अशुद्धीयाँ निकलती हैं जो आसपास के वातावरण के साथ-साथ उनके आसपास रहने वाले लोगो के लिए हानिकारक होती है। इससे संक्रमण फैलने का ड़र बना रहता है। ऐसा नही कहा जाता है की उस समस उनके शरीर से कुछ विशेष प्रकार की तंरगे नकारात्मक (नेगाटिव एनर्जी) निकलती है जो की वातावरण को दूषित भी कर सकती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से
वैज्ञानिक मत के अनुसार इस समय महिलाओं को इनफेक्शन का अधिक खतरा रहता है। यही कारण है कि अन्य लोगों को इसके बुरे प्रभाव एवं महिलाओं को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें घर के कामकाज से अलग रखकर आराम करने की बात कही गयी होगी।

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