सरकार ने ट्विटर को नए आईटी नियमों के अनुपालन के लिए ‘आख़िरी मौका’ दिया

सरकार की ओर से आगाह किया गया है कि यदि ट्विटर आईटी नियमों का अनुपालन करने में विफल रहती है तो आईटी एक्ट और अन्य दंडात्मक कानूनों के अनुसार उसे परिणाम का सामना करना पड़ेगा. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि ट्विटर द्वारा इन नियमों के अनुपालन से इनकार से पता चलता है कि उसमें प्रतिबद्धता की कमी है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने बीते शनिवार को ट्विटर को नोटिस जारी कर उसे तत्काल नए आईटी नियमों के अनुपालन के लिए ‘एक आखिरी मौका’ दिया है.

सरकार की ओर से आगाह किया गया है कि यदि ट्विटर इन नियमों का अनुपालन करने में विफल रहता है तो आईटी एक्ट और अन्य दंडात्मक कानूनों के अनुसार उसे परिणाम का सामना करना पड़ेगा.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि ट्विटर द्वारा इन नियमों के अनुपालन से इनकार से पता चलता है कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट में प्रतिबद्धता की कमी है और वह भारत के लोगों को अपने मंच पर सुरक्षित अनुभव प्रदान करने का प्रयास नहीं करना चाहती.

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा, ‘भारत में करीब एक दशक से अधिक से परिचालन के बावजूद यह विश्वास करना मुश्किल है कि ट्विटर ने एक ऐसा तंत्र विकसित करने से इनकार कर दिया है, जिससे भारत के लोगों को उसके मंच पर अपने मुद्दों के समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उचित प्रक्रिया के जरिये हल में मदद मिलती है.’

मंत्रालय ने कहा कि ये नियम हालांकि 26 मई, 2021 से प्रभावी हैं, लेकिन सद्भावना के तहत टि्वटर को एक आखिरी नोटिस के जरिये नियमों के अनुपालन का अवसर दिया जाता है. उसे तत्काल नियमों का अनुपालन करना है.

यदि वह इसमें विफल रहता है, तो उसे दायित्व से जो छूट मिली है, वह वापस ले ली जाएगी. साथ ही उसे आईटी कानून और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा.

नोटिस में हालांकि यह नहीं बताया गया है कि ट्विटर को इन नियमों का अनुपालन कब तक करना है.

सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ट्विटर ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के व्यक्तिगत एकाउंट से ‘ब्लू टिक’ सत्यापन बैज को कुछ समय के लिए हटा दिया था. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और अन्य नेताओं के भी ‘ब्लू टिक’ हट गए थे.

नए आईटी नियमों के तहत सरकार द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों को 26 मई तक एक शिकायत अधिकारी, एक मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक नोडल संपर्क व्यक्ति नियुक्त करने के लिए कहा गया था.

ट्विटर को छोड़ गूगल, फेसबुक और वॉट्सऐप ने नए डिजिटल मीडिया नियमों के तहत सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से ब्योरा साझा कर दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी से ही ट्विटर और केंद्र सरकार के बीच उस समय से खींचतान जारी है, जब केंद्रीय प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन पर देश में किसानों के विरोध से संबंधित आलोचना को चुप कराने का आरोप लगाने वाली सामग्री को ब्लॉक करने के लिए ट्विटर से कहा गया था.

उसके बाद भारत ने नए आईटी नियमों की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सोशल मीडिया फर्मों को पोस्ट/सामग्री को जल्द से जल्द से हटाने के लिए कानूनी अनुरोधों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना और शिकायतों के निपटारे के लिए एक भारतीय शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करना जरूरी है.

इन नियमों के अनुपालन और भाजपा नेताओं द्वारा कथित तौर पर भ्रामक सामग्री साझा करने के लिए ट्विटर द्वारा उन पर कार्रवाई को लेकर बीते दिनों काफी विवाद हुआ था.

सोशल मीडिया मंच ने कहा था कि वह भारत के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, क्योंकि यह उसके लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन नए आईटी नियम और विनियमन की आलोचना करते हुए उसने कहा था कि वह इससे मुक्त और खुले सार्वजनिक विचार विमर्श की स्वतंत्रता पर संभावित खतरे को लेकर चिंतित है.

कंपनी ने भारत में कार्यरत अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि वह पारदर्शिता के सिद्धांतों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए काम करती रहेगी.

बीते मई महीने में ट्विटर ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के उपायों को लेकर सरकार को निशाना बनाने के लिए विपक्षी दल के कथित रणनीतिक दस्तावेज (टूलकिट) पर सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं के कई ट्वीट को ‘तोड़ मरोड़ कर पेश तथ्य’ (मैनिपुलेटेड मीडिया) बताया था. उसके बाद दिल्ली पुलिस कंपनी के दफ्तरों पर छापा मारा था. उस वक्त सरकार पर ट्विटर को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे थे.

हालांकि सरकार ने पुलिस के जरिये डराने-धमकाने संबंधी ट्विटर के आरोप की कड़ी निंदा की और इसे पूरी तरह आधारहीन तथा गलत बताया था.

कंपनी का कहना है कि वह उसके प्लेटफार्म पर डाली जाने वाली सामग्री को लेकर एक व्यक्ति (अनुपालन अधिकारी) को आपराधिक तौर पर जवाबदेह बनाने के प्रावधान को लेकर चिंतित है. इसके साथ ही सक्रिय रूप से निगरानी करने और उसके उपयोगकर्ताओं के बारे में जानकारी मांगे जाने के अधिकार को लेकर भी चिंतित है.

मालूम हो कि केंद्र सरकार की ओर से इस साल फरवरी में इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियम 2021 नाम से लाए गए ये दिशानिर्देश देश के टेक्नोलॉजी नियामक क्षेत्र में करीब एक दशक में हुआ सबसे बड़ा बदलाव हैं. ये इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियम 2011 के कुछ हिस्सों की जगह भी लेंगे.

नए नियमों के हिसाब से बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को किसी उचित सरकारी एजेंसी या अदालत के आदेश/नोटिस पर एक विशिष्ट समय-सीमा के भीतर गैर कानूनी सामग्री हटानी होगी.

इन नए बदलावों में ‘कोड ऑफ एथिक्स एंड प्रोसीजर एंड सेफगार्ड्स इन रिलेशन टू डिजिटल/ऑनलाइन मीडिया’ भी शामिल हैं. ये नियम ऑनलाइन न्यूज और डिजिटल मीडिया इकाइयों से लेकर नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी लागू होंगे.

नियमों के तहत स्वनियमन के अलग-अलग स्तरों के साथ त्रिस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली भी स्थापित की गई है. इसमें पहले स्तर पर प्रकाशकों के लिए स्वनियमन होगा, दूसरा स्तर प्रकाशकों के स्वनियामक निकायों का स्वनियिमन होगा और तीसरा स्तर निगरानी प्रणाली का होगा.

नियमों में सेक्सुअल कंटेट के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है, जहां किसी व्यक्ति के निजी अंगों को दिखाए जाने या ऐसे शो जहां पूर्ण या आंशिक नग्नता हो या किसी की फोटो से छेड़छाड़ कर उसका प्रतिरूप बनने जैसे मामलों में इस माध्यम को चौबीस घंटों के अंदर इस आपत्तिजनक कंटेंट को हटाना होगा.

नए नियमों को निजता खत्म करने वाला बताते हुए वॉट्सऐप ने दिल्ली हाईकोर्ट में उन्हें चुनौती दी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)



source http://thewirehindi.com/172376/modi-govt-gives-one-last-opportunity-to-twitter-to-comply-with-it-rules/

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