कान्हा की बासुरी में छिपे हैं कई राज

नई दिल्ली (लोकसत्य)। भगवान कृष्‍ण का नाम आते ही हमारे मन में भगवान की बाल और युवावस्‍था की सुंदर छवि उभरकर आती है। मस्‍तक पर शोभायमान मोरपंख और उनके अधरों पर बांसुरी, मानो भगवान साक्षात रूप में हमें दर्शन दे रहे हों। आपने श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाते हुए प्रतिमा जरूर देखी होगी। श्रीकृष्ण के द्वारा धारण किए गए प्रतीकों में बांसुरी हमेशा से सभी लोगों के लिए ज्ञिज्ञासा का केंद्र रही है। अधिकतर लोग श्रीकृष्ण बांसुरी से जुड़े हुए रहस्य और कहानी नहीं जानते। भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी में जीवन का सार छुपा हुआ है। आइए, हम आपको बताते हैं श्रीकृष्ण की बांसुरी से जुड़े रहस्य और कहानी।

  1. बांसुरी में गांठ नहीं है। वह खोखली है। इसका अर्थ है अपने अंदर किसी भी तरह की गांठ मत रखो। चाहे कोई तुम्हारे साथ कुछ भी करें बदले कि भावना मत रखो।
  2. बिना बजाए बजती नहीं है, यानी जब तक न कहा जाए तब तक मत बोलो। बोल बड़े कीमती है, बुरा बोलने से अच्छा है शांत रहो।
  3. जब भी बजती है मधुर ही बजती है। मतलब जब भी बोलो तो मीठा ही बोलो। जब ऐसे गुण किसी में भगवान देखते हैं, तो उसे अपना लेते हैं।

कहानी
एक बार श्रीकृष्ण यमुना किनारे अपनी बांसुरी बजा रहे थे। बांसुरी की मधुर तान सुनकर उनके आसपास गोपियां आ गई। उन्होंने बातों में लगाकर श्रीकृष्ण की बांसुरी को अपने पास रख लिया। गोपियों ने बांसुरी से पूछा ‘आखिर पिछले जन्म में तुमने ऐसा कौन-सा पुण्य कार्य किया था। जो तुम केशव के गुलाब की पंखुडी जैसे होंठों पर स्पर्श करती रहती हो? ये सुनकर बांसुरी ने मुस्कुराकर कहा ‘मैंने श्रीकृष्ण के समीप आने के लिए जन्मों से प्रतीक्षा की है। त्रेतायुग में जब भगवान राम वनवास काट रहे थे। उस दौरान मेरी भेंट उनसे हुई थी। उनके आसपास बहुत से मनमोहक पुष्प और फल थे. उन पौधों की तुलना में मुझमें कोई विशेष गुण नहीं था। पंरतु भगवन ने मुझे दूसरे पौधों की तरह ही महत्व दिया। उनके कोमल चरणों का स्पर्श पाकर मुझे प्रेम का अनुभव होता था। उन्होंने मेरी कठोरता की भी कोई परवाह नहीं की।

The post कान्हा की बासुरी में छिपे हैं कई राज appeared first on Hindi News: हिन्दी न्यूज़, Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, लेटेस्ट हिंदी न्यूज़, ब्रेकिंग न्यूज़ | Loksatya.



source https://www.loksatya.com/spirituality/many-secrets-are-hidden-in-kanhas-flute/

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ