पटना एम्स में बच्चों पर कोवैक्सीन का ट्रायल शुरू, दिल्ली में स्क्रीनिंग आज

भारत बायोटेक का कोवैक्सीन टीका बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है या नहीं, इसके लिए एम्स पटना में 12-18 साल के बच्चों पर ट्रायल शुरू हो चुका है। इसके लिए एम्स दिल्ली में आज बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। यह ट्रायल ऐसे समय में किया जा रहा है जब विशेषज्ञ तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं और यह डर है कि पर्याप्त संख्या में लोगों को टीका नहीं लगाया गया तो तीसरी लहर में वायरस बच्चों पर हमला करेगा।

भारत में अब तक बच्चों के लिए किसी भी वैक्सीन को मंजूरी नहीं मिली है, जबकि अमेरिका और कनाडा में फाइजर की वैक्सीन के 12-18 साल के बच्चों पर आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है। चीन भी अपनी वैक्सीन कोरोनावैक को बच्चों पर इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे चुका है।

भारत में फाइजर के टीके को अब तक मंजूरी नहीं मिली है। अब तक सिर्फ़ तीन टीके- भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका से क़रार करने वाले सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन ही मंजूर की गई हैं। 

अब कोवैक्सीन का बच्चों पर जो ट्रायल किया जा रहा है उसका कई शहरों में संचालन किया जा रहा है। एम्स पटना में 12-18 साल के 21 बच्चों पर ट्रायल शुरू हो चुका है। एम्स पटना के अधीक्षक डॉ. सीएम सिंह ने 'एनडीटीवी' को बताया कि ये परीक्षण देश भर के 175 बच्चों पर किए जाएँगे, जिनमें प्रत्येक केंद्र में 20-20 बच्चे होंगे। उन्होंने कहा कि 6-12 साल के बच्चों के लिए रजिस्ट्रेशन मंगलवार से शुरू होगा। 

इसी के तहत एम्स दिल्ली में भी दो साल से 18 साल के बीच बच्चों पर ट्रायल किया जाना है। इसके लिए आज ही स्क्रीनिंग होगी। बता दें कि भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के टीके को 2-18 साल के बच्चों पर ट्रायल करने की घोषणा की है। इसके लिए भारत की नियामक संस्था डीसीजीआई से मंजूरी मिल चुकी है। 
कोरोना की दूसरी लहर में हज़ारों लोगों की जानें गई हैं। हालाँकि, देश में कोरोना संक्रमण की यह रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है।

अब भारत में पिछले 2 महीने में सबसे कम नए केस सामने आए हैं और रिकवरी रेट 93.67 प्रतिशत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की संख्या क़रीब 25वें दिन रोज आने वाले नए पॉजिटिव मामलों से अधिक है।

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