किस नदी में मिलते हैं सबसे पवित्र शिवलिंग

नई दिल्ली (लोकसत्य)। जब हम मंदिर जाते हैं तो सबसे पहले शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करते हैं क्योंकि मान्यता है की शिवलिंग से शिव और शक्ति दोनों की ही उपासना सम्पूर्ण हो जाती है और शिव बहुत ही जल्दी प्रसन्न होने वाले भगवान हैं लेकिन क्या आप जानते है कि किस शिवलिंग की पूजा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और फलदायी मानी जाती है। तो चलिए हम आपको आज बताते हैं।

फलदायी शिवलिंग
विभिन्न प्रकार के शिव लिंगों की पूजा करने का प्रावधान है. जैसे- स्वयंभू शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग, जनेउधारी शिवलिंग, सोने और चांदी के शिवलिंग और पारद शिवलिंग. इनमें से नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा सबसे ज्यादा फलदायी होती है। ग्रंथों में नर्मदा को भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। मान्यता है कि जो फल गंगा नदी में स्नान से मिलता है, वही फल मात्र नर्मदा नदी के दर्शन से प्राप्त होता है। इसका उल्लेख नर्मदा पुराण में भी किया गया है। नर्मदा से निकला हर कंकड़ भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। नर्मदा से निकले शिवलिंग को नर्मदेश्वर भी कहा गया है। जिसका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में किया गया है।

शिव को नर्मदा का रिश्ता
नर्मदा से निकलने वाले पत्थर शिवलिंग के आकार के होते हैं। पौराणिक कथाओं में माना गया है कि चूंकि नर्मदा भगवान शिव की पुत्री हैं, इसलिए नर्मदा में ही शिवलिंग निर्मित होते हैं। देश की अन्य नदियों में मिलने वाले पत्थर पिंड के रूप में नहीं मिलते हैं। इससे यह प्रमाणित होता है कि केवल नर्मदा नदी पर ही शिव कृपा है।नर्मदा नदी के शिवलिंग को सीधा ही स्थापित किया जा सकता है, इसके प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है। नर्मदा देश की ऐसी नदी है जो पूर्व से पश्चिम की ओर उल्टी दिशा में बहती है। देश के प्रतिष्ठित मंदिरों में नर्मदा से निकले शिवलिंग ही स्थापित किए गए हैं।

नर्मदेश्वर की आराधना
प्रातःकाल स्नान करके शिवलिंग को एक थाल या बड़े पात्र में रखें,बेलपत्र और जल की धारा अर्पित करें ,इसके बाद शिव जी के मंत्रों का जाप करें ,थाल या पात्र में एकत्रित जल को पौधों में डाल सकते है।

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