Kalashtami 2021: जानें कब है कालाष्टमी, क्या है इसका महत्त्व

नई दिल्ली (लोकसत्य)। साल में 12 महीने होते हैं और हर महीने कालाष्टमी पड़ती है। यानि साल भर में 12 कालाष्टमी होती है। ज्येष्ठ माह में कालाष्टमी 2 जून, बुधवार के दिन पड़ रही है। अष्टमी व्रत उदया तिथि को रखा जाता है। कालाष्टमी के दिन भगवान शिव का विग्रह रूप माने जाने वाले कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। इनके दो रूप हैं पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध हैं तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक हैं। भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता।

माना जाता है कि कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति भयमुक्त होता है और भविष्य में आने वाले सभी संकट आने से पहले ही दूर हो जाते हैं।इनकी पूजा करने से निरोगी काया मिलती है जो अपराधिक प्रवृति वाले होते हैं उनके लिए भगवान भैरव भयंकर दंडनायक होते हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इसकी पूजा करने से सकरात्मक शक्तियां हमारे पास अति है और नकरात्मक शक्तियां दूर जाती हैं।

कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त:

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ का समय 02 जून रात्रि 12 बजकर 46 मिनट से होगा और समाप्ती का समय 03 जून रात्रि 01 बजकर 12 मिनट पर

कालाष्टमी व्रत का महत्व:
काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र रूप माना जाता है। वह समस्त पापों और रोगों का नाश करने वाले हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी के दिन श्रद्धापूर्वक वर्त रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखकर कुंडली में मौजूद राहु के दोष से भी मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही शनि ग्रह के बुरे प्रभावों से भी काल भैरव की पूजा करके बचा जा सकता है। तंत्र साधन करने वाले लोगों के लिए भी कालाष्टमी का दिन बहुत खास होता है।

कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठें। नित्य-क्रम एवं स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।शुभ स्थान पर कालभैरव की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद चारों तरह गंगाजल का छिड़काव करें।अब उन्हें फूल अर्पित करें। साथ ही नारियल, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ आदि चीजें अर्पित करें। इसके बाद चौमुखी दीपक जलाएं और धूप-दीप करें।

भैरव चालीसा का पाठ करें। इसके साथ ही भैरव मंत्रों की 108 बार जप करें
आरती के बाद पूजा संपन्न करें। भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता है इसलिए जब व्रती व्रत खोलें तो उसे अपने हाथ से कुछ पकवान बनाकर सबसे पहले कुत्ते को भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से भगवान काल भैरव की कृपा आती है। पूरे मन से काल भैरव भगवान के पूजा करने पर भूत, पिचाश, प्रेत और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं अपने आप ही दूर हो जाती हैं।

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