दिल्ली: यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ा, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों की पहचान करने को कहा गया

यमुना निगरानी समिति ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण के मुख्य स्रोतों की पहचान कर 10 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है. यह निर्देश ऐसे वक़्त आया है, जब दिल्ली जल बोर्ड ने आरोप लगाया है कि बार-बार कहने के बावजूद हरियाणा ने उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए क़दम नहीं उठाया है.

यमुना नदी. (फोटो: पीटीआई)

यमुना नदी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा नियुक्त यमुना निगरानी समिति ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को प्रदूषण के ‘मुख्य स्रोतों’ की पहचान करने को कहा है, जिनके कारण दिल्ली में नदी में अमोनिया के स्तर में वृद्धि हुई है. समिति ने 10 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है.

समिति का यह निर्देश ऐसे वक्त आया है, जब दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने आरोप लगाया है कि बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बावजूद हरियाणा ने उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए कदम नहीं उठाया है और सीपीसीबी से तुरंत समाधान के लिए उपाय करने का आग्रह किया है.

समिति ने मीडिया की एक खबर का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली के वजीराबाद में यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़कर सात पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) हो गया जबकि मान्य सीमा 0.8 पीपीएम है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह भी बताया गया है कि इसका मुख्य कारण नालों के माध्यम से यमुना नदी में प्रवेश करने वाला औद्योगिक अपशिष्ट/अनुपचारित घरेलू सीवेज है.

यमुना निगरानी समिति में दिल्ली की पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा और एनजीटी के सेवानिविृत्त विशेषज्ञ सदस्य बीएस सजवान शामिल हैं.

समिति ने कहा, ‘खबर में कहा गया है कि मुख्य रूप से रोहतक रेगुलेटर के जरिये नाला संख्या छह और आठ से यमुना नदी में उद्योगों का गंदा पानी आने के कारण यह स्तर बढ़ा है.’

समिति ने कहा कि हर साल दिसंबर से फरवरी के दौरान सर्दी के महीनों में अमोनिया (अमोनिकल नाइट्रोजन) के स्तर में बढ़ोतरी होती है. ऐसे में सीपीसीबी और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) सर्दी के महीनों के दौरान निगरानी तंत्र को मजबूत बनाएं और उद्योगों की गतिविधियों की निगरानी करें. प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए भी कदम उठाए जाएं.

समिति ने सीपीसीबी को एचएसपीसीबी के साथ मिलकर यमुना में अमोनिया के उच्च स्तर के लिए प्रदूषण के मुख्य स्रोतों की पहचान करने और 10 जनवरी तक एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है.

यमुना निगरानी समिति ने हरियाणा के मुख्य सचिव के समक्ष भी यह मामला उठाया है और उनसे अनुपचारित गंदा पानी का यमुना नदी में बहाव रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने के वास्ते अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया है.

दिल्ली जल बोर्ड ने हाल में कहा था कि हरियाणा सरकार के लापरवाह रवैये के खिलाफ वह अदालत जाने पर विचार कर रहा है, क्योंकि उसने यमुना में गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए कदम नहीं उठाया और इससे राष्ट्रीय राजधानी में आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है.

दैनिक ट्रिब्यून के मुताबिक वहीं, जल बोर्ड का कहना है कि वह जल्द ही अमोनिया के उच्च स्तर का को उपचारित करने के लिए चंद्रावल और वजीराबाद संयंत्रों में ओजोनेशन इकाइयों को स्थापित करने के लिए काम शुरू करेगा.

यमुना में अमोनिया के उच्च स्तर ने दिल्ली जल बोर्ड को इस पिछले साल कम से कम पांच बार अपने संयंत्रों में पानी के उत्पादन को कम करने या रोकने पर मजबूर किया.

डीजेबी ने कहा कि हरियाणा में दो नहरें- डीडी-1 और डीडी-2 दूषित पानी को यमुना में ले जाती हैं. डीडी-2 को डाई ड्रेन के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस नहर में औद्योगिक इकाइयों से बड़ी मात्रा में अपशिष्ट मिलता है.

दोनों नहरें हरियाणा के पानीपत जिले के शिमला गुजरान गांव के पास मिलती हैं और खोजकीपुर गांव के पास यमुना में मिल जाती हैं, जहां अमोनिया का स्तर अक्सर 40 पीपीएम तक पहुंच जाता है.

इसके यमुना के अलावा डीडी-8 नहर से भी दिल्ली शहर को पानी की आपूर्ति की जाती है. डीडी-8 नहर के साथ कुछ किलोमीटर की दूरी पर एक और नहर डीडी-6 (प्याऊ मनहारी, हरियाणा में) बहती है, जिसमें हरियाणा से भारी मात्रा में औद्योगिक और घरेलू कचरा बहता है.

दिल्ली जल बोर्ड ने कहा कि इन दोनों नहरों को रेत की बोरियों के माध्यम से अलग किया जाता है, जो कई जगहों पर खराब होती हैं. परिणामस्वरूप डीडी-6 का दूषित पानी डीडी-8 के साथ मिश्रित होता है और अमोनिया दिल्ली पहुंचता है.

यमुना में जहरीले प्रदूषक की जांच के लिए एक अध्ययन समूह का गठन

यमुना में जहरीले प्रदूषक अमोनियाकल नाइट्रोजन के बढ़ते स्तर को लेकर चिंतित सीपीसीबी ने नदी में अमोनिया के स्तर की निगरानी के लिए मंगलवार को एक अध्ययन समूह का गठन कर दिया है.

सीपीसीबी द्वारा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली के अधिकारियों के साथ आयोजित एक बैठक में यह निर्णय लिया गया.

बैठक में यमुना में अमोनिया के बढ़ते स्तर और अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई पर विचार-विमर्श किया गया.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया, ‘एक अध्ययन समूह में डीजेबी, एचएसपीसीबी, डीपीसीसी, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी शामिल हैं.’

सूत्रों ने बताया, ‘समूह समान निगरानी प्रोटोकॉल और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता की समीक्षा करेगा, पिछले डाटा का विश्लेषण करेगा और महत्वपूर्ण ‘हॉटस्पॉट्स’ की पहचान करने के साथ ही अमोनिया के उच्च स्तरों की अवधि के लिए एक सर्वेक्षण करेगा.’

अध्ययन समूह निरंतर समाधानों के लिए छोटे और दीर्घकालिक उपाय सुझाएगा और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौपेंगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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