छत्तीसगढ़: राज्य सरकार ने धान की खरीद रोकी, कहा- केंद्र नहीं उठा रहा भंडार

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के किसानों से खरीदे धान की कस्टम मिलिंग के बाद केंद्रीय पूल में चावल जमा करने की अनुमति मांगी है. राज्य में कई धान बिक्री केंद्रों ने किसानों से कहा है कि धान की पैदावार रखने की जगह न होने के कारण वे अगले कुछ दिनों तक फसल बेचने न आएं.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. (फोटो साभार: फेसबुक/@BhupeshBaghelCG)

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. (फोटो साभार: फेसबुक/@BhupeshBaghelCG)

रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि राज्य में किसानों से खरीदे गए धान की कस्टम मिलिंग के बाद केंद्रीय पूल में चावल जमा करने की अनुमति प्रदान करें.

एक अधिकारी ने बताया कि बघेल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के साथ फोन पर बातचीत की. प्रधानमंत्री ने उन्हें जल्द से जल्द उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया.

राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी ने कहा कि बुधवार को बघेल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और उनसे मिलने के लिए समय मांगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तथ्यों को उनके सामने रखा जा सके.

बघेल ने पत्र में कहा कि खरीफ विपणन सत्र में किसानों से खरीदे गए धान की कस्टम मिलिंग के बाद केंद्रीय पूल में 60 लाख टन चावल जमा करने के लिए केंद्र ने राज्य को ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ दे दी है.

उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार ने एक दिसंबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीद अभियान शुरू किया, और अब तक 12 लाख किसानों से 47 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है. लेकिन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से केंद्रीय पूल में चावल जमा करने के लिए केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से आवश्यक अनुमति मिलने का अभी भी इंतजार है.’

उन्होंने कहा कि इसको लेकर कई बार लिखित और मौखिक संचार के माध्यम से केंद्रीय खाद्य मंत्री से अनुरोध किया गया, लेकिन मंजूरी अभी तक नहीं मिली है.

उन्होंने कहा कि इसकी अनुमति मिलने में देरी ने धान खरीद अभियान और कस्टम मिलिंग प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में कई धान बिक्री केंद्रों पर एक नोटिस चस्पा किया गया है जिसमें कहा गया है कि धान की पैदावार को रखने के लिए जगह न होने के कारण वे अगले कुछ दिनों तक फसल बेचने न आएं.

हालांकि, इस बीच किसानों में ऐसी धारणा बन रही है कि उन्हें  नए कृषि कानूनों का विरोध करने के कारण यह खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. दरअसल, राज्य के कई किसान संगठन दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल हैं.

एक किसान नेता सुदेश तकम ने कहा, ‘केंद्र और राज्य सरकार लड़ रही हैं और हम हार रहे हैं, जैसे कि हमें कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए दंडित किया जा रहा है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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