आइए करें ‘डाटा वॉरियर्स ’ का सम्मान

 देश की अर्थव्यवस्था हो या नीित िनर्माण। इन सबके लिए जमीनी आंकड़ों की जरूरत होती है। कुछ लोग बहुत खामोशी से यह काम कर रहे हैं। आप इन्हें डाटा वॉरियर्स कह सकते हैं। कोविड जैसे महासंकट के दौर में भी जब गैरजरूरी होने पर हम घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं, तब भी ये डाटा वॉरियर्स अपनी जान जोखिम में डालकर देश के कोने-कोने से सटीक आंकड़े इकट्ठे कर रहे हैं, तािक सरकार आपके िवकास के लिए सही नीति बना सके।

 

आइए करें ‘डाटा वॉरियर्स ’ का सम्मान

आपने गंदगी दूर करने में सहयोग करने वाले स्वच्छता वॉरियर्स ्स के बारे में सुना होगा! कोविड-19 जैसी महामारी में भारत की जंग को दुनिया में मजबूत करते कोरोना वॉरियर्स के बारे में भी सुना होगा! लेकिन कुछ ऐसे वॉरियर्स भी हैं जो गरीबों से जुड़ी योजनाओं, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के विभिन्न मानकों के साथ सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) से जुड़े आंकड़ों को हर मौसम और परिस्थिति में जमीन से एकत्रित करने के लिए जूझतें हैं। 

अब सवाल उठता हैकि इन आंकड़ों का इस्तेमाल कौन और किसके लिए करता है? दरअसल, सरकार अपनी जिन योजनाओं और नीतियों को लेकर जनता तक पहुंचती है, उसके पीछे यही डाटा काम आता है, जिसे शुरूआती स्तर पर नेशनल सैंपल सर्वे (एनएसएस) के डाटा वॉरियर्स इकट्ठा करते हैं। कोरोना जैसी महामारी के इस दौर में भी करीब 6 लाख फील्ड ऑफिसर कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस काम में जुटे हैं। जमीन से एकत्रित डाटा को आईटी और एप के माध्यम से दर्ज किया जाता है ताकि तेजी से डाटा का विश्लेषण हो सके। 

सही आंकड़े, सही विकास: डाटा वॉरियर्स करते हैं ये काम
सही आंकड़े, सही विकास: डाटा वॉरियर्स करते हैं ये काम


डाटा क्यों और कितना है महत्वपूर्ण डाटा की महत्ता को अमेरिका के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् विलियम एडवर्ड डेमिंग के इन शब्दों से समझा जा सकता है, “डाटा के बिना आप सिर्फ एक राय देने वाले व्यक्ति मात्र हैं।” यानी डाटा किसी भी विचार को मजबूत करने का आधार होता है। उद्योग, बाजार के आंकड़े, शिक्षा, स्वास्थ्य, खान-पान, रहन सहन से लेकर जरुरी चीजों पर ग्रामीण-शहरी आबादी कितना खर्च करती है? इन सभी विषयों के लिए डाटा अहम है, क्योंकि इसी को आधार बनाकर सरकार नीति निर्धारित करती है। 

अगर आंकड़े सही होंगे, तभी विकास भी सही तरीके से हो सकता है। इसलिए इन डाटा वॉरियर्स ्स का अहम नारा भी है- “सही आंकड़े, सही विकास”। एनएसएस के महानिदेशक ए.के. साधु कहते हैं, “समय-समय पर भारत सरकार कृषि, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, बाजार मूल्य, उत्पादन, महंगाई, स्वास्थ्य आदि विषयों पर सर्वे कराती है, जिसके लिए हम आंकड़े जुटाते हैं। आंकड़े जुटाए जाने के बाद इस पर काम करके रिपोर्ट तैयार होती है। इसी रिपोर्ट को सरकार के नीति- निर्धारण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विश्वविद्यालयों में भी इसका इस्तेमाल शोध के लिए किया जाता है।” आसान नहीं है डाटा जुटाना सरकार आम लोगों के लिए नीतियां बनाती ह तो उसके प ै ीछे एक विस्तृत अध्ययन और आधार होता ह। ै किस इलाके में कोल्ड स्टोरेज की जरुरत हैया फिर गरीबों को पक्के आवास, जीवन के लिए सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जसै ी बनुियादी सुविधाएं, इसकी जानकारी आंकड़े जटाने वाले इन ु ्हीं योद्धाओं के जरिए सरकार को मिलती ह। ै लेकिन आंकड़े इकट्ठे करना सहज काम नहीं होता। कई बार उन्हें पहाड़ी चढ़ना होता ह, तो दूरदराज के आ ै दिवासी इलाकों में पगडंडियों के सहारे गांव तक पहुंचना होता ह, और ै फिर वहां लोगों को भरोसे में लेकर सही आंकड़ा लाना होता ह। ै इस काम से जड़े एक अ ु धिकारी अपना अनभव इन शब ु ्दों में बताते हैं, “मझे ु याद हैकि जब मैं अंडमान-निकोबार में था, वहां पर कभी-कभी सर्वे में छोटे द्वीप चयनित हो जाते थे। ऐसे गांव में सर्वे करना चनौत ु ीपूर्ण थी। हमारे डाटा वॉरियर्स जहाज से जाते थे, लेकिन ये जहाज समद्र ु में रुक जाते थे और फिर सीढ़ी के जरिए छोटी नाव तक पहुंचकर द्वीप तक जाते थे। 

डाटा वॉरियर्स को देश के लिए कई बार अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती ह।” कई बार लोग ऐसे स ै र्वेक्षण करने वालों के साथ कठोरता और अशिष्टता भरा व्यवहार करते हैं। ऐसे ही एक डाटा वॉरियर्स बताते हैं, “कई बार सूचना देने वाले कठोर रुख दिखाते हैं। लेकिन इससे हमारा आत्मविश्वास कमजोर नहीं पड़ता, क्योंकि हमें मालूम हैकि देश की अर्थव्यवस्था के लिए हम क्या कर रहे हैं।” 

आर्थिक गणना के उप महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव के मता ुिबक इस वक्त मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे का काम चल रहा ह, जो ै दिसंबर 2020 तक पूरा करना ह। ै विभिन्न योजनाओं के तहत करीबन 23 करोड़ परिवारों तक पहुंचने के लिए 6 लाख ऐसे वॉरियर्स ्स हर परिस्थिति में जटे रहते हैं ु जो सही मायने में राष्ट्र की सेवा में लगे हैं। ऐसे में सही आंकड़े देकर आप भी देश की सेवा कर सकते हैं।

डाटा वॉरियर्स की कहानी, कविता की जुबानी… 

कोरोना ने जब थाम लिया जग का सारा कारोबार,

जीवन सारा ठप पड़ गया, चिंतित थी सरकार

कैसे बने देश की नीति, बिन डाटा के भाई,

और किस हिस्से में हुई देश के कब कितनी महंगाई,

कौन बताए उत्पादन के, रोजगार के डाटा

गूंज रहा था प्रश्न मगर, था उत्तर में सन्नाटा,

कोरोना के भय से आतुर था सारा संसार,

कौन उठाता ऐसे में डाटा लाने का भार,

और डाटा गैप रह गया अगर फिर पाटे नहीं पटेगा,

एफओडी*बोला इस संकट को वही उत्तर देगा,

सैनेटाइजर लगा हाथ पर, चेहरे पर मास्क,

जान हथेली पर लिए चले पूरा करने को टास्क,

कठिन परिस्थिति में भी जो दुर्गम पथ पर जाता,

डाटा संग्रह की खातिर शीत, घाम सब सह जाता,

एनएसएस का क्षेत्र कार्मिक जो कोरोना से लड़ जाता,

हिंदुस्तान कह उठा वीर को डाटा वॉरियर्स कहलाता!

हिंदुस्तान कह उठा वीर को डाटा वॉरियर्स कहलाता!

(*एफओडी यानी फील्ड ऑपरेशन डिविजन)

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